कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच आज भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी वीकली एक्सपायरी के दिन 25900 के करीब फिसल गया। इंफोसिस, रिलायंस, ICICI बैंक और L&T जैसे हैवीवेट शेयरों ने बाजार पर भारी असर डाला जबकि रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे।

आज का शेयर बाजार ( Share Market) बिल्कुल रोलर-कोस्टर की तरह रहा। सुबह से ही ग्लोबल मार्केट्स (Global Markets) का प्रेशर भारतीय मार्केट पर साफ दिखा और निफ्टी वीकली एक्सपायरी के दिन अच्छे खासे दबाव में नजर आया। ओपनिंग के बाद से ही निफ्टी ढलान पर चला गया और 100 प्वाइंट से ज्यादा गिरकर करीब 25,900 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा।
इंफोसिस, रिलायंस, ICICI बैंक और L&T जैसे हैवीवेट्स की कमजोरी ने ओवरऑल मार्केट का मूड और बिगाड़ दिया। वहीं बैंक निफ्टी पूरे दिन लगभग फ्लैट ही घूमता रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी हल्की कमजोरी बनी रही। रियल्टी और मेटल जैसे सेक्टर तो सबसे ज्यादा टूटे दोनों इंडेक्स लगभग 1.5% तक फिसल गए। वेदांता, हिंदुस्तान जिंक और SAIL में दो से तीन परसेंट की तेज गिरावट ने मेटल सेक्टर को और नीचे धकेला। आईटी, FMCG और फार्मा भी आज राहत देने की बजाय बाजार का साथ छोड़ते दिखे।
SAMCO सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धमेजा का कहना है कि अभी बाजार में जो गिरावट दिख रही है, वह ग्लोबल संकेतों की वजह से है लेकिन निफ्टी के लिए 25,850–25,780 एक बहुत अहम सपोर्ट जोन है। धमेजा के मुताबिक अगर निफ्टी इस बैंड के ऊपर टिकता है तो ओवरऑल ट्रेंड अब भी पॉजिटिव माना जाएगा। यानी हल्की गिरावट के बावजूद ट्रेंड बुल्स के फेवर में है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बाजार की चाल पर अपनी राय देते हुए कहा कि ग्लोबल कमजोरी के बीच यह तीन चीजें भारतीय मार्केट को संभाले हुए हैं। पहली, व्हाइट हाउस की ओर से आया संकेत कि अमेरिका, भारत के साथ ट्रेड डील के काफी करीब है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और मार्केट दोनों के लिए बड़ा पॉजिटिव है। दूसरी, दुनिया भर में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का क्रेज थोड़ा कम हो रहा है जो भारत जैसे उभरते बाजार के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि ऐसा माहौल भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर बनाता है। तीसरी और सबसे अहम घरेलू फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हो रहे हैं। इकोनॉमिक ग्रोथ ज्यादा है और कंपनियों की कमाई भी लगातार बेहतर दिख रही है। विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशक भले ही हाल-फिलहाल नेट बॉयर बने हैं लेकिन इसे अभी ट्रेंड मानना जल्दबाजी होगी। GST में कटौती की उम्मीदों ने कंजम्पशन सेक्टर को थोड़ा उत्साह दिया है लेकिन बाजार को लगातार टिकाए रखने के लिए कंजम्पशन का मजबूत रहना बहुत जरूरी होगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि बाजार में मजबूत डायरेक्शनल मूव देखना है, तो ट्रेडर्स को दो चीजों पर खास नजर रखनी होगी, 26,000 CE पर शॉर्ट कवरिंग शुरू होती है या नहीं, 25,900/25,950 के आसपास फ्रेश पुट राइटिंग आती है या नहीं। इन दोनों स्तरों पर एक्टिविटी से ट्रेंड साफ तय होगा कि अगली चाल ऊपर की ओर है या बाजार अभी और कूल-डाउन मोड में रहेगा। कुल मिलाकर, मोमेंटम अभी भी बुल्स के पक्ष में दिख रहा है। डेरिवेटिव डेटा, वोलैटिलिटी और कंजम्प्शन से जुड़ी उम्मीदें अभी भी बाजार को मजबूती दे रही हैं।