अजित पवार के निधन पर नाना पाटेकर का भावुक खुलासा

नाना पाटेकर काफी भावुक नजर आए। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि हम अजित पवार के निधन से बेहद दुखी हैं। मेरा उनका साथ तब से था जब वे केवल 19-20 साल के थे।

Nana Patekar emotional
अजित पवार के निधन पर नाना पाटेकर भावुक (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 04:51 PM
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Actor Nana Patekar : महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजित पवार के निधन की खबर ने न केवल राजनीतिक गलियारों बल्कि मनोरंजन जगत को भी स्तब्ध कर दिया है। इस दुखद घड़ी में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए पवार परिवार के साथ अपनी गहरी साझेदारी दर्शाई है।

जब वे 19-20 साल के थे... नाना पाटेकर का भावुक खुलासा

मीडिया से बात करते हुए नाना पाटेकर काफी भावुक नजर आए। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि हम अजित पवार के निधन से बेहद दुखी हैं। मेरा उनका साथ तब से था जब वे केवल 19-20 साल के थे और उन्होंने एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।"

नाना पाटेकर ने अजित पवार के सफर को याद करते हुए कहा, "हमने उन्हें जमीन से उठकर शिखर तक पहुंचते देखा है। अजित पवार ने जिस तरह से शुरुआत की और जिस मुकाम तक पहुंचे, वो एक कमाल का सफर था।" उन्होंने अपने रिश्ते को याद करते हुए भावुक होते हुए कहा, "मैं अजित को हमेशा मिस करूंगा, वे मेरे अच्छे दोस्त और छोटे भाई जैसे थे।"

सुनेत्रा पवार और रोहित पवार पर बोले नाना

नाना पाटेकर ने इस कठिन समय में पवार परिवार के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा कि वह इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ हैं। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को लेकर उन्होंने कहा, "उन पर दुखों का पहाड़ है, लेकिन उन्होंने जो पदभार संभाला है, उसे वे निभाएंगी।" इसके अलावा, रोहित पवार द्वारा विमान हादसे पर उठाए गए सवालों पर भी नाना पाटेकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "रोहित पवार परिवार के सदस्य हैं। उनके मन में जो सवाल आए थे, उसे उन्होंने बोला। मैंने रोहित पवार को सुना नहीं है, तो मैं उस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकता।" उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच हो रही है और अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों को सजा मिलेगी।

राजनीति से इतर रिश्ता और NCP के विलय पर बयान

राजनीति से इतर मानवीय रिश्तों को तवज्जो देते हुए नाना पाटेकर ने कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति के रूप में अजित पवार का व्यक्तित्व प्रभावशाली था। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और एनसीपी (NCP) के गुटों के विलय की चर्चाओं पर भी नाना ने संक्षिप्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भविष्य की चीजें अब दो पार्टियों के फैसलों और परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। Actor Nana Patekar

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जाने भारत का गौरव, सम्राट अशोक का ऐतिहासिक परिचय

अशोक के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) पर आक्रमण किया। यह युद्ध इतिहास के सबसे खूनी युद्धों में से एक था, जिसमें लगभग एक से पंद्रह लाख लोगों की जान गई।

Emperor Ashoka Historical
अशोक के धर्म प्रचार के अमिट प्रमाण (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 03:39 PM
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Historical introduction of Emperor Ashoka : मौर्य वंश के इतिहास में एक ऐसे शासक का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया है, जिन्होंने तलवार के बजाय धर्म की शक्ति को अपनाते हुए विश्व इतिहास में एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। सम्राट अशोक, जिन्हें उनके शासनकाल में 'असोक' के नाम से जाना जाता था, न केवल मौर्य साम्राज्य का विस्तार किया, बल्कि कलिंग युद्ध के बाद अपने जीवन के बदले हुए रूप के कारण आज भी एक आदर्श शासक के रूप में याद किए जाते हैं।

चंडाशोक से प्रियदर्शी तक का सफर

चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र और बिंदुसार के पुत्र अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में हुआ था। अपने प्रारंभिक जीवन में अशोक एक महत्वाकांक्षी और कठोर शासक थे, जिन्हें 'चंडाशोक' कहा जाता था। उन्होंने उज्जैन और तक्षशिला में हुए विद्रोहों को कुचलने में अपनी क्षमता का परिचय दिया। ईसा पूर्व 273 के आसपास सिंहासन संभालने वाले अशोक ने अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल के कारण मौर्य साम्राज्य का विस्तार पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बंगाल और दक्षिण में मैसूर तक कर दिया।

कलिंग युद्ध: जीवन का निर्णायक मोड़

अशोक के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) पर आक्रमण किया। यह युद्ध इतिहास के सबसे खूनी युद्धों में से एक था, जिसमें लगभग एक से पंद्रह लाख लोगों की जान गई। इस विनाश और खूनखराबे ने अशोक के हृदय में हलचल मचा दी। युद्ध के भयावह परिणामों ने उन्हें इतना विचलित किया कि उन्होंने युद्ध और हिंसा का मार्ग हमेशा के लिए त्याग दिया।

धम्म विजय और लोककल्याणकारी नीतियां

कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया और 'धम्म विजय' (धर्म द्वारा विजय) का नारा दिया। उन्होंने अपने साम्राज्य में प्रजा के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया। उनके शासनकाल में मानव और पशु अस्पतालों की स्थापना, सड़कों पर पेड़ लगाना, कुओं की खुदाई और सिंचाई केंद्रों का निर्माण जैसे लोककल्याणकारी कार्य कराए गए। उन्होंने पशु शिकार पर भी प्रतिबंध लगा दिया। अपनी प्रजा के प्रति करुणा और प्रेम के कारण उन्हें 'देवनमप्रिय प्रियदर्शी' की उपाधि मिली। उन्होंने घोषणा की, "सभी मनुष्य मेरे बच्चे हैं।"

शिलालेखों में दर्ज है विरासत

अशोक ने अपने विचारों और आदेशों को देश के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर चट्टानों और स्तंभों पर उत्कीर्ण करवाया। सारनाथ में मिला सिंह स्तंभ आज भारत गणराज्य का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया है, जबकि अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अंग है। उन्होंने अपने पुत्र महिंदा और पुत्री संघामित्रा को बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा।

अंतिम विदाई

37 वर्षों तक शासन करने वाले इस महान सम्राट का 72 वर्ष की आयु में पाटलिपुत्र में निधन हो गया है। उनकी मृत्यु के बाद मौर्य वंश का विभाजन हो गया और उनके पौत्र दशरथ मौर्य ने उनका उत्तराधिकार संभाला है। इतिहासकार मानते हैं कि अशोक ने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची विजय वह नहीं जो युद्ध से मिलती है, बल्कि वह है जो धर्म और दया से प्राप्त होती है। Historical introduction of Emperor Ashoka

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समुद्र में चलता ‘ईंधन का पहाड़’, जानिए जहाज का खर्चा गणित

अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री ईंधन की कीमतें तेल बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। औसतन इसकी कीमत 600 से 800 डॉलर प्रति टन के बीच रहती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 50,000 से 65,000 रुपये प्रति टन बैठती है।

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जानिए जहाज के ईंधन का गणित (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 02:39 PM
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Ship Fuel Consumption: जब भी माइलेज की बात होती है तो आमतौर पर गाड़ियों को किलोमीटर प्रति लीटर के पैमाने पर आंका जाता है। लेकिन समुद्र में हजारों कंटेनर ढोने वाले विशाल जहाजों के लिए गणित बिल्कुल उल्टा हो जाता है। यहां सवाल यह नहीं होता कि जहाज 1 लीटर में कितनी दूरी तय करता है, बल्कि यह कि वह 1 किलोमीटर में कितने लीटर ईंधन जला देता है।

एक बड़े कंटेनर जहाज की खपत

करीब 350 से 400 मीटर लंबे बड़े कंटेनर जहाज प्रति किलोमीटर लगभग 200 से 250 लीटर तक ईंधन खर्च कर सकते हैं। इनकी दैनिक खपत स्पीड और लोड के अनुसार 150 से 250 टन तक पहुंच जाती है। आमतौर पर ये जहाज 20 से 24 नॉट (लगभग 37 से 44 किमी/घंटा) की क्रूजिंग स्पीड से चलते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पीड में हल्की सी बढ़ोतरी भी ईंधन खपत को काफी बढ़ा देती है। यही वजह है कि शिपिंग कंपनियां लागत कम रखने के लिए नियंत्रित रफ्तार बनाए रखती हैं।

कौन सा ईंधन इस्तेमाल करते हैं जहाज?

साधारण गाड़ियों की तरह पेट्रोल या डीजल नहीं, बल्कि बड़े समुद्री जहाज ‘बंकर फ्यूल’ का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मुख्य रूप से वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल (VLSFO) या हैवी फ्यूल ऑयल (HFO) शामिल हैं। यह ईंधन सामान्य डीजल से ज्यादा गाढ़ा और भारी होता है और खास समुद्री इंजनों के लिए तैयार किया जाता है।पर्यावरणीय नियम सख्त होने के बाद कई जहाजों ने सल्फर उत्सर्जन कम करने के लिए कम सल्फर वाले ईंधन को अपनाया है।

1 किलोमीटर में कितना आता है खर्च?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री ईंधन की कीमतें तेल बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। औसतन इसकी कीमत 600 से 800 डॉलर प्रति टन के बीच रहती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 50,000 से 65,000 रुपये प्रति टन बैठती है। यदि एक जहाज प्रति किलोमीटर लगभग 250 लीटर ईंधन खर्च करता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर उसका अनुमानित ईंधन खर्च प्रति किलोमीटर करीब 15,000 से 20,000 रुपये तक हो सकता है।

क्यों बदलती रहती है खपत?

जहाज की ईंधन खपत स्थिर नहीं होती। कार्गो का वजन, जहाज का आकार, समुद्री मौसम और स्पीड जैसे कारक इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। पूरी तरह लदा हुआ जहाज इंजन पर ज्यादा दबाव डालता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। स्पष्ट है कि समुद्री व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले ये विशाल जहाज न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि इनके संचालन में ईंधन लागत एक अहम भूमिका निभाती है। Ship Fuel Consumption


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